After Corona, China will make another invention, the whole world will be in danger

कोरोना के बाद चीन करेगा एक और अविष्कार, पूरी दुनिया होगी खतरे में

चीन अपने आप मंसूबों को पूरा करने के लिए कुछ भी कर सकता है। और उसके लिए चाहे पूरी दुनिया Q न खातम हो जाए मानव जनजाति खतरे में पड़ जाए चीन को उसकी कोई परवाह नही पड़ता है ।

इसमें कोई शक नही की चीन आज के समय में एक आर्थिक बहुत बड़ी महाशक्ति बनने है और चीन चीते की रफ्तार से अपनी अर्थव्यवस्था को बहुत आगे बढ़ाता चला जा रहा है ।

लेकिन जैसा कि हमनें उल्लेख किया है कि चीन पूरी मानव जनजाति को खतरे में डाल सकता है, तो जैसा कि उसने पूरी दुनिया को covid-19 या कोरोना वायरस जैसी भयंकर महामारी बीमारी को सुलझा दिया । अमरीका और बहुत से देशों के मुताबिक में डाल दिया है चीन ने ये एक बायोलॉजिकल हथियार भी बनाया जिसकी मदद से चीन अपने दुश्मनों का निपता सकता देना चाहता था

इस बार चीन सीधा-2 प्राकृतिक के खिलाफ जाकर अंतरिक्ष में भेजने का प्रयास करने जा रहा उसका नाम है । महाआकार का सोलर पैनल (solar pannel) आपको सोलर पैनल का नाम सुनते ही यह आपलौग को ई लगा होगा कि यह तो एक आम सी मशिन है, इसमें कोई बड़ी बात नही हो सकती है क्योंकि अंतरिक्ष में Allredy पहले से ही बड़े -बड़े स्पेसस्टेशन जैसे कि ISS और TINGYONG घूम रहे हैं । लेकिन चीनी सोलर पैनल का आकार इनसे कई जदा गुना बड़ा होने वाला है इसका अंदाज़ा आप इसी से ही लगा सकते हैं कि ये करीब 1GW मतलब एक गिगवाट बिजली बनाएगा. इसकी वजह से भारत समेत दुनिया के बडे-बडे स्पेस सेटेलाइट प्रोग्राम खतरे में पड़ सकता है ।

अतः वैसे तो अविष्कार मानव जीवन को सुखद बनाने के लिए किए जा रहे हैं पर चीन के अविष्कार इंसानों को फायदे कम नुकसान बहुत जदा होग । जैसेकि चीन में आज नकली अंडे, चावल और मांस बनाया जा रहा है. ठीक उसी तरह ऐसा ही खतरा अब चीन अंतरिक्ष में सोलर पैनल भेजकर सेटाप करने वाले है। Acchual में चीन उसकी ऊर्जा से एक बहुत बड़े स्पेस स्टेशन को चलाना चाहती है, ये इतनी बजली पैदा करेगा कि एक छोटे- मोटे शहर को भी आसानी से बिजली दे सकता है ।

अंतरिक्ष विज्ञानियों का कहना है कि चीन इस पैनल से निकलने वाली अतिरिक्त ऊर्जा का महा समुद्र में गिरयाएगा. लेकिन इसमें थोड़ी से भी चूक अगर हो जाती है तो पुरे पृथ्वी के लोगों को तबाही भीष्म गर्मी और आग जैसी घटनाओं का सामना करना पड़ सकता है ।

चीन इस महत्वाकांक्षी योजना करीब 1942 से काम कर रहा है और 82 साल बीत जाने के बाद चीन इसके काफी नजदीक पहुंच गया है । चीन इसे 228 में लांच करने वाला है और चीन ने इस बात का भरोसा दिलवाया है कि इस से दुनिया का कोई नुकसान नही होगा लेकिन अब यह देखना होगा कि 35050 किलोमीटर की ऊंचाई पर ये पैनल स्थिरता से काम कर पायेगा या नही ।

टेक्नोलॉजी के मामलों में सभी देशों से आगे है चिन और कोई ऐसा मशीन नहीं है जो चीन नहीं बनाया हो

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