महात्मा गांधी के जीवन की कहानी | Mahatma Gandhi Biography

महात्मा गांधी जी का पुरा नाम :- मोहनदास करमचन्द गांधी है । उनका जन्म 02 अक्टूबर 1869 में गुजरात के पोरबंदर में हुआ था हुआ और वो पुतलीबाई और करमचंद गांधी के तीन बेटों में सबसे छोटे थे और अल्बर्ट हाई स्कूल में पढ़े। पढ़ने-लिखने में वो औसत थे। सन् 1883 में करीब 13 साल की उम्र में करीब छह महीने बड़ी कस्तूरबा से उनका ब्याह हो गया। 15 अगस्त 1947 को भारत आजाद हुआ। और साथ ही देश भारत और पाकिस्तान नाम के दो मुल्कों में विभाजत भी हो गया। 30 जनवरी 1948 को एक हिन्दू कट्टरपंथी नाथूराम गोडसे ने महात्मा गांधी की गोली मारकर हत्या कर दी गई।

तो चलिए अब आपको बिस्तार (Details) से सुनाते हैं । गांधी जी ने भारत एवं भारतीय स्वतन्त्रता आन्दोलन के एक बहुत बड़ी प्रमुख राजनैतिक एवं आध्यात्मिक नेता थे। वे सत्याग्रह (व्यापक सविनय अवज्ञा) के माध्यम से अत्याचार के प्रतिकार के अग्रणी नेता थे, उनकी इस अवधारणा की नींव सम्पूर्ण अहिंसा के सिद्धान्त पर रखी गयी थी जिसने भारत को भारतीय स्वतन्त्रता संग्राम दिलाकर पूरी दुनिया में जनता के नागरिकता अधिकारों एवं स्वतन्त्रता के प्रति आन्दोलन के लिये प्रेरित किया है। उन्हें दुनिया में आम जनता महात्मा गांधी के नाम से जानती है। संस्कृत भाषा में महात्मा अथवा महान आत्मा एक सम्मान सूचक शब्द भी है। गांधी को महात्मा के नाम से सबसे पहले 1915 में राजवैद्य जीवराम कालिदास ने संबोधित किया था। एक अन्य मत के अनुसार स्वामी श्रद्धानन्द ने 1915 मे महात्मा की उपाधि दी थी, तीसरा मत ये है कि गुरु रविंद्रनाथ टैगोर ने महात्मा की उपाधि प्रदान की थी। 12 अप्रैल 1919 को अपने एक लेख मे | उन्हें बापू (गुजराती भाषा में बापू यानी पिता कहा जाता है) के नाम से भी स्मरण किया जाता है। एक मत के अनुसार गांधीजी को बापू सम्बोधित करने वाले प्रथम व्यक्ति उनके साबरमती आश्रम के शिष्य थे सुभाष चन्द्र बोस ने 6 जुलाई 1944 को रंगून रेडियो से गांधी जी के नाम जारी प्रसारण में उन्हें राष्ट्रपिता कहकर सम्बोधित करते हुए आज़ाद हिन्द फौज के सैनिकों के लिये उनका आशीर्वाद और शुभकामनाएँ माँगीं थीं। प्रति वर्ष 2 अक्टूबर को उनका जन्म दिन भारत में गांधी जयन्ती के रूप में और पूरे विश्व में अन्तरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस के रूप में मनाया जाता है और उस दिन पुरे भारत बंद रहता है।

सबसे पहले गान्धी जी ने प्रवासी वकील के रूप में दक्षिण अफ्रीका में भारतीय समुदाय के लोगों के नागरिकों अधिकारों के लिये संघर्ष हेतु सत्याग्रह करने का आरम्भ किया। 1915 में उनकी भारत वापसी हुई हुई थी। उसके बाद उन्होंने यहाँ के किसानों, श्रमिकों और नगरीय श्रमिकों को अत्यधिक भूमिका कर और भेदभाव के विरुद्ध आवाज उठाने के लिये एकजुट किया थे। 1921 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की बागडोर संभालने के बाद उन्होंने देशभर में दरिद्रता से मुक्ति दिलाने का थान लिए और महिलाओं के अधिकारों का विस्तार, धार्मिक एवं जातीय एकता का निर्माण व आत्मनिर्भरता के लिये अस्पृश्‍यता के विरोध में अनेकों कार्यक्रम चलाऐ थे। पर इन सबमें विदेशी राज से मुक्ति दिलाने वाला स्वराज की प्राप्ति वाला कार्यक्रम ही प्रमुख था। गाँधी जी ने ब्रिटिश सरकार द्वारा भारतीयों पर लगाये गये लवण कर के विरोध में 1930 में नमक सत्याग्रह और इसके बाद अंग्रेजों ने 1942 में भारत छोड़ने का आन्दोलन से विशेष विख्याति प्राप्त की। दक्षिण अफ्रीका और भारत में विभिन्न अवसरों पर कई वर्षों तक उन्हें कारागृहों में भी रहना पड़ा था।

महात्मा गाँधी द्वारा किये गये आंदोलन

निम्नलिखित बापू द्वारा देश की आजादी के लिए लड़े गए प्रमुख आंदोलन-

असहयोग आंदोलन

गाँधी जी जलियांवाला बाग नरसंहारों से ज्ञात हो गया था की ब्रिटिश सरकार से न्याय की अपेक्षा करना व्यर्थ है। लेकिन उन्होंने सितंबर 1920 से फरवरी 1922 के मध्य भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के नेतृत्व में असहयोग से आंदोलन चलाया। लाखों भारतीय के सहयोग मिलता रहा इस दौरान यह आंदोलन अत्यधिक सफल रहा। और इससे ब्रिटिश सरकार को भारी झटका लगा और भारत छोड़कर भागना पड़ा।

नमक सत्याग्रह

साबरमती आश्रम से 12 मार्च 1930 (अहमदाबाद में स्थित स्थान) से दांडी गांव तक 24 दिनों तक पैदल मार्चा निकाले थे। यह आंदोलन ब्रिटिश सरकार के नमक पर एकाधिकार के खिलाफ छेड़ा गया था। और गाँधी जी द्वारा किये गए आंदोलनों में यह सर्वाधिक महत्वपूर्ण आंदोलन था।

दलित आंदोलन

गाँधी जी द्वारा 1932 में अखिल भारतीय छुआछूत विरोधी लीग की स्थापना भी हुई और उन्होंने छुआछूत विरोधी आंदोलन की शुरूआत 8 मई 1933 में किया गया था ।

भारत छोड़ो आंदोलन

भारत को तुरंत आजाद करने के लिए महात्मा गाँधी द्वारा अखिल भारतीय कांग्रेस के मुम्बई अधिवेशन से द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान 8 अगस्त 1942 को भारत छोड़ो आंदोलन आरम्भ किया भी थे ।

चंपारण सत्याग्रह

ब्रिटिश ज़मींदार गरीब को किसानो से बहुत कम मूल्य पर जबरदस्ती नील की खेती करा रहे थे। इससे किसानों में भूखे मरने की स्थिति पैदा हो गई थी। यह आंदोलन बिहार के चंपारण मोतीहारी जिले से 1917 में प्रारंभ किया गया। और यह उनकी भारत में पहली राजनैतिक की बहुत बड़ी जीत हुई थी।

महात्मा गाँधी का पूरा नाम मोहनदास करमचंद गाँधी
पिता का नाम :- करमचंद गांधी
माता का नाम :- पुतलीबाई
पत्नी का नाम :- कस्तूरबा गांधी
महात्मा गाँधी का जन्म :- 2 अक्टूबर, 1869
महात्मा गाँधी की संतान :- हरिलाल, मनिलाल, रामदास और देवदास
योगदान :- भारत की स्वतंत्रता, अहिंसक आंदोलन, सत्याग्रह
महत्मा गाँधी की मृत्यु:- 30 जनवरी, 1948
मृत्यु स्थान :- नई दिल्ली

 

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